गुरुवार, 29 सितंबर 2016

क्या होता है सर्जिकल स्ट्राइक ?

सर्जिकल स्ट्राइक का मतबल घर में घुसकर मारना
हरिगोविंद विश्वकर्मा 
18 सितंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में आतंकी हमले के बाद 10 दिन बाद भारतीय सेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल पार करके पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादियों को उनके घर में घुसकर हमला किया। सेना के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने बताया कि हमले में बड़ी संख्या में आतंकवादियों को मार गिराया गया है। डीजीएमओ ने साथ ही बताया कि इस्लामाबाद को सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में बता दिया गया है और भारत ने इस ऑपरेशंस को तत्काल बंद कर दिया है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से अगर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया या दुस्साहस किया जाता है तो भारतीय सेना पूरी दमखम के साथ सामना करने के लिए तैयार हैं।

भारतीय सेना का सर्जिकल स्ट्राइक नाम का ऑपरेशन चार घंटे चला। ऑपरेशन की शुरुआत बुधवार रात क़रीब साढ़े बारह बजे भिंबर, हॉटस्प्रिंग केल और लीपा सेक्टर्स में हुई। ऑपरेशन में सेना के स्पेशल फोर्स के जवान शामिल थे। कमांडों को एलओसी पर हेलीकॉप्टर्स के जरिए उतारा गया। वहां से रेंगकर एलओसी के अंदर गए। तीन किलोमीटर तक गए थे। उसके बाद उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक किया। सभी जवान नाइट विजन से लैस थे।

भारतीय़ सेना ने जब से इस ऑपरेशन को सर्जिकल स्ट्राइक नाम दिया है, तब से लोग चर्चा कर रहे हैं कि मिलिट्री ऐक्शन या हमला तो ठीक है, यह सर्जिकल स्ट्राइक आख़िर क्या बला है? सीधे शब्दों में सर्जिकल स्ट्राइक का मतलब घर में घुसकर मारना। दरअसल, 18 सितंबर के उरी आतंकवादी हमले का बदला लेते हुए भारतीय सेना लाइन ऑफ़ कंट्रोल के उस पार घुस गई और आतंकवादी टेरर लॉन्चिंग पैड पर हमला कर दिया। इसमें 40 प्रशिक्षित आतंकवादी और पाकिस्तानी सेना के दो जवान मार डाले गए।

दरअसल, जब भी सेना कोई ऐसा ऑपरेशन करती है जो स्पेशिफिक टारगेट ओरिएंटेड होता है यानी वह ऑपरेशन जिसमें सिविलियन्स को कोई नुकसान नहीं होता, केवल दुश्मन की सेना या जो टारगेट पर है उस पर स्टाइक करती है और उसी को नुकसान पहुंचाती है। सर्जिकल स्ट्राइक सेना की योजनाबद्ध तरीके से हमला करने की नीति है। इसमें सैनिकों को बता दिया जाता है कि जवान इस बात का ख्याल रखें कि उनके हमले में ऐसा कोई नुकसान न हो जिससे आम नागरिक आहत हों।

कहने का मतलब सेना हमला करती है, परंतु आम नागरिक, भवन, वाहन को नुकसान न के बराबर करने की कोशिश करती है। तब हमला सर्जिकल स्ट्राइक कहा जाता है। सर्जिकल स्ट्राइक में इमारत, बस्ती या नागरिकों को कोई नुकसान नहीं होता। भारत ने भी 28-29 सितंबर की रात जो ऑपरेशन किया उसमें पाकिस्तान सिविलियन्स को कोई नुकसान नहीं हुआ। सेना ने इस बात का ख्याल रखा कि आम नागरिकों और इलाके को नुकसान न हो सिर्फ उन आतंकियों को मार गिराया जाए जो भारत में घुसने का प्रयास पिछले कई दिनों से कर रहे थे। इसी बिना पर भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन को सर्जिकल ऑपरेशन कहा है।

वस्तुतः भारत को ख़ुफिया इनपुट्स मिला था कि पाकिस्तानी सेना लाइन ऑफ कंट्रोल से 40 से 50 प्रशिक्षित आतंकवादियों को कश्मीर में घुसपैठ कराना चाहती है। इसके बाद सेना ने प्रधानमंत्री को सूचना दी गई। पीएमओ से गो अहेड का सिग्नल मिलने के बाद भारतीय सेना एलओसी के अंदर घुस गई और सात आतंकवादी पैड को नष्ट कर दिया। सेना के साथ लड़ने के लिए दो पाकिस्तानी सैनिक आए। लिहाज़ा, उन्हें भी अपनी जान गंवानी पड़ी। समझा जाता है इस ऑपरेशन में 70 से ज़्यादा आतंकवादी मारे गए है।

दरअसल, सर्जिकल स्ट्राइक में 'सरप्राइज' होता है, यानी टारगेट पर अचानक हमला कर दिया जाता है ताकि सामने वाले को जवाब देने का मौका ही न मिले। असल में यह सेना द्वारा किया जाने वाला एक नियंत्रित हमला होता है, जिसमें किसी खास इलाके में पहले से तय विशेष ठिकाने पर हमला करके उसे नष्ट किया जाता है. इससे सेना द्वारा बड़े पैमाने पर उस इलाके में बर्बादी को रोका जाता है और खास तरह से अटैक को डिजाइन किया जाता है।

भारतीय सेना का यह दूसरा सर्जिकल स्ट्राइक है। इससे पहले सेना के स्पेशल फोर्सेज के 70 कमांडोज़ ने पिछले साल जून में म्यानमार के जंगल में घुसकर 38 नगा आतंकवादियों को मार डाला था। आतंकियों ने चार जून को 18 भारतीय सैनिकों की हत्या कर दी थी।

सर्जिकल स्ट्राइक शब्द पहली बार 2001 में तब चर्चा में आया था। जब अमेरिका की अगुवाई में तालिबान और अल कायदा के ठिकानें पर हमला किया गया। अमेरिकी सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक के तहत एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया था। बहरहाल, सर्जिकल स्ट्राइक का यह सिलसिला 2003 में शुरू हुए इराक युद्ध में भी चला। इराक युद्ध के दौरान इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन को पकड़ने के लिए अमेरिकी सेनाएं सर्जिकल स्ट्राइक करती थीं। अमेरिकी और 2004 में सद्दाम हुसैन को पकड़ने के लिए अमेरिका ने सर्जिकल स्ट्राइक किया था।

दुनिया का सबसे बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक अमेरिका ने मई 2011 में किया और दुनिया के मोस्ट वांटेड आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को उसके ठिकाने पर घुस कर मार गिराया और उसका शव समुद्र में फेंक दिया। इस कार्य को अंजाम दिया अमेरिकी की इलीट पोर्स यूएस नेवी सील्स ने।

सर्जिकल स्ट्राइक के मामले में इजराइल अमेरिका से भी ज़्यादा ख़तरनाक रहा है। इजराइल डिफेंस फोर्सेस के 100 कमांडो ने 1976 में यूगांडा में फिलीस्तीन आतंकवादियों के ख़िलाफ़ सर्जिकल स्ट्राइक किया था और सभी को मौत के घाट उतार दिया था। दरअसल, आतंकियों ने फ्रैंच विमान का अपहरण करके 106 इज़राइली नागरिकों को बंधक बना लिया था, इजराइली कमांडो ने यूगांडा की सेना के 37 जवानों को भी मार डाला था। अततः अपने नागरिकों को मुक्त कराकरे इजराइल वापस लौट गए थे।

इसी तरह 1961 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैंनेडी ने क्यूबा के फीडल कास्ट्रो को सत्ताच्युत करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक किया था और कास्ट्रो को हटाने में सफल रहा। इस लड़ाई में स्पेशल फोर्स के कमांडोज़ ने कास्ट्रो समर्थक 100 सैनिकों को मार डाला था। 1979 में ईरानी छात्रों ने तेहरान में 53 अमेरिकी कर्मचारियों को अमेरिकन दूतावास में बंधक बना लिया था। जिमी कार्टर का वह सर्जिकल स्ट्राइक –ऑपरेशन ईगल क्लॉ- असफल रहा, क्योंकि अमेरिकन स्पेशल फोर्सेस को भारी नुसान उठाना पड़ा और किसी बंधक को छुड़ाया नहीं जा सका। 1989 में पनामा के तानाशह मैनुएल नोरिगा को सत्ताच्युत करने के लिए अमेरिका की स्पेशल फोर्सेस ने सर्जिकल स्ट्राइक किया। इस ऑपरेशन को अंजाम लादेन को मारने वाली यूएस नेवी सी ने दिया। हमले के बाद अततः नोरिगा ने समर्पण कर दिया।

इसी तरह 1993 में यूएस स्पेशल फोर्स को सोमाली सेनापति मोहम्मद फराह ऐदीदी को पकड़ने वाला सर्जिकल स्ट्राइक भी बुरी तरह अस्फल रहा। विरोधी सैनिकों ने दो यूएस ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर को मार गिराया। 18 अमेरीकी जवा3न मारे गए जबकि 70 ज़ख्मी हुए। सन् 2003 में इराकी सेना ने नासिरिया में यूएस सोल्जर जेसिका लिंच को पकड़ लिया। नौ दिन बाद अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने अस्पताल पर सर्जिकल स्ट्राइक करके जसिका को छुड़ा लिया।

सन् 2003 में ही सीआईए ने सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान में किया। दरअसल 9/11 का की प्लानर खालिद शेख मोहम्मद समेत कई आतंकवादियों के पकड़ने के लिए यह ऑपरेशन किया गया। सर्जिकल स्ट्राइक रावलपिंडी में हुई थी। सन् 2006 में इराक में अल क़ायदा नेता अबु मुसाब अल-ज़रवाक़ी को पकड़ने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक किया था। इस हमले में अबु मुसाब अल-ज़रवाक़ी अमेरिकी सेना के हाथ मारा गया।
  
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