गुरुवार, 21 अगस्त 2014

व्यंग्य : हारना टीम इंडिया का एजेंडा

हरिगोविंद विश्वकर्मा
आजकल भारतीय क्रिकेट टीम खूब हार रही है. जम कर हार रही है. लगातार हार रही है. रविवार को तो लंदन के ओवल में तीसरे दिन ही हार गई. पूरी टीम ने 94 पर ऑलआट होकर इस अहम हार में बड़ा योगदान किया. वैसे, लगता है भारतीय क्रिकेट टीम ने हार को नया एजेंडा बनाया है. लगे रहो भारतीय वीरों. ऐसे ही हारते रहो. हारने का रिकॉर्ड तुमसे कोई नहीं छीन सकेगा. वह दिन दूर नहीं, जब हारने का रिकॉर्ड टीम इंडिया के नाम हो. अग्रिम बधाई. लगातार हारने के लिए शुभकामनाएं.

वैसे भी भारत में खेल को लेकर अगल पंरपरा है. जीतने को अहमियत नहीं दी जाती. खेलना ही सबसे बड़ी खेलभावना मानी जाती है. उसमें भी बिना ख़ास प्रयास के अगर हार मिल रही है, तो क्या कहना. यह तो सोने पर सुहागा जैसा है. ऐसा सौभाग्य बहुत कम लोगों को मिलता है. जहां, देश की महान जनता हारने वाले शूरवीरों को सिर आंखों पर बिठाती है. वाक़ई भारत महान देश है. यहां लोग हारकर भी महान हो जाते हैं. जैसे गांधी देश के बंटवारे के बावजूद महान हो गए. नेहरू चीन से हारने के कारण है आधुनिक भारत के प्रणेता बन गए. देश की तमाम सड़कों का नाम इन्हीं के नाम हो गया. सो, भारतीय हारों और महान बनो. पुरस्कार जीतो.

जीतने के लिए तो सब खेलते हैं. बहुत कम लोग होते हैं, जो हारने के लिए खेलते हैं. महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया वहीं काम कर रही है. मतलब हार रही है. जीतने के लिए बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ती है. खूब पसीना बहाना पड़ता है. एकदम चौकन्ना होकर खेलना पड़ता है. ये सब तामझाम कौन करे. पैसे तो आमतौर पर उतने ही मिलने हैं. फिर हारा क्यों न जाए. हार से आमदनी पर तो कोई फ़र्क़ पड़ेगा नहीं. इसलिए टीम इंडिया हार को लगा लिया है. वह खूब हार रही है. सच्चे खेलप्रेमियों को गद्गद कर रही है.

हारना उतना भी आसान नहीं है जितना लोग समझते हैं. यानी हार कोई आसान या मोटी बुद्धि का काम नहीं है. हारने के लिए भी दिमाग़ खपाना पड़ता है. मसलन, क्या किया जाए कि हार आसानी से जाए. हार जल्द से जल्द मिल जाए. लिहाज़ा, टीम चुनते समय ख़ास ध्यान दिया जाता है. खिलाड़ियों का चयन उनके रिकॉर्ड के मुताबिक किया जाता है. उनके मौजूदा फ़ॉर्म के आधार पर उनका चुनाव नहीं होता. इससे लगातार हारने में अवरोध आने का ख़तरा रहता है. इन-फ़ार्म बल्लेबाज रन बनाकर हार के महान अभियान को रोक सकता है. इसलिए, तय किया जाता है कि टीम का चयन रिकॉर्ड के आधार पर हो. सो चयन समिति ऐसे महान खिलाड़ियों को चुनती है जो हारने में योगदान करें.

बैटिंग हो या फ़िल्डिंग दोनों में कुछ नियम का पालन करना पड़ता है. मसलन, बल्लेबाज आंख मूंदकर बल्ला चलाते हैं. ध्यान देते हैं कि गेंद बल्ले पर न लगे. नहीं तो रन बनने का ख़तरा रहता है. सो, गेंद लगे तो केवल बल्ले किनारे पर आने देते हैं. ताकि कैच उठे और स्लिप या पॉइंट पर खड़े फ़िल्डरों के हाथ चली जाए. इससे आउट होने में आसानी रहती है. यह भी कोशिश होती है, ज़्यादा से ज़्यादा अच्छे  बल्लेबाज शून्य पर आउट हों. कभी-कभार दुर्भाग्य से बल्लेबाज खाता खुल जाता है. तब है भूल-सुधार की कोशिश करता है. बल्लेबाज दहाई तक पहुंचने से पहले आउट होने की पुरी कोशिश करता है. कभी-कभी बदनसीबी या विपक्षी टीम की बदमाशी से दहाई पार कर जाता है. तब 20 या 30 रन पर पैवेलियन वापस आने की कोशिश करता है. टीम जो भी रन बनती है. उसे गेंदबाज बना देते हैं. दरअसल, शून्य पर आउट होने की टिप उन्हें नहीं मिली होती है. सो दुर्घटनावश वे चौके-छक्के मार बैठते हैं और हार को लंबा खींच देते है. वे मज़ा किरकिरा कर देते हैं. इससे हार के लिए इंतज़ार करना पड़ता है. हार देर से मिलती है.

सहजता से हारने के लिए फ़िल्डिंग करते समय भी रणनीति बनानी पड़ती है. अच्छे कैचटेकर को स्लिप, पॉइंट या कवर पर नहीं खड़ा किया जाता है. उसे उस जगह खड़ा किया जाता है, जहां गेंद कम जाती है. इससे विपक्षी बल्लेबाज के आउट होने का कम से कम ख़तरा रहता है. उसे एक जगह खड़े रहने की हिदायत होती है. वह मैदान में एक जगह खड़े-खड़े कल्पनाएं करता है. अपनी प्रेमिका के बारे में सोचता है. वह फ़िल्डर कैच या गेंद पकड़ने के लिए बिलकुल नहीं दौड़ता. आना होगा तो कैच या गेंद उनके पास आएगा. वरना जाए सीमारेखा के बाहर. इससे हारने की संभावना बलवती होती है.

गेंदबाज भी गेंद को स्टंप पर नहीं मारते. ऐसी गेंद फ़ेकने की कोशिश करते हैं, जिस पर ख़ूब रन बने. विकेट तो कतई न गिरे. विपक्षी टीम का विकेट गिरा, वह जल्द आउट हुई तो हारेंगे कैसे. सो हारने की रणनीति बनाकर गेंद फेंकी जाती है. यह भी कोशिश की जाती है कि जब बल्लेबाज जम जाए तब अच्छे गेंदबाज से गेंद कराई जाती है. इससे अच्छा गेंदबाज जमे हुए बल्लेबाज को आउट नहीं कर पाता. लिहाज़ा, राइवल टीम बड़ा स्कोर बनाती है. बड़े स्कोर के सामने हारने में सुविधा रहती है. आराम से हार जाते हैं. एक पारी के अंतर से हार कर इतिहास बनाते हैं.

ये छोटे-छोटे टिप्स हैं जो हारने में बड़े काम आते हैं. कप्तान इन पर ध्यान देता है. मज़े सा हारता है. धानी ने पिछली दोनों हार को टीम की कामयाबी बताया. इस बात पर खुशी ज़ाहिर की कि टीम इंडिया तीन दिन में ही हार गई. मैच के दो दिन बच गए. घूमने-फिरने और मौज़मस्ती करने के लिए. उम्मीद है हार का टैंपो, टीम इंडिया वनडे मैचों में बनाए रखेगी. ऑल द बेस्ट धोनी ऐंड कंपनी!

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